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मूल आगम

Original Scriptures

आचार्यों के मूल ग्रन्थ — बड़े विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए।

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मूल ग्रन्थ

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मोक्षशास्त्र (तत्त्वार्थसूत्र) — सटीक

दशलक्षण धर्म का मूल सूत्र — अध्याय 9, सूत्र 6।

साभार: आचार्य उमास्वामी · टीका: रामजी माणेकचन्द दोशी · हिन्दी अनुवाद: पं. परमेष्ठीदास न्यायतीर्थ
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बारस अणुवेक्खा (द्वादशानुप्रेक्षा)

धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 70–80 — दसों धर्म, एक-एक गाथा में।

साभार: आचार्य कुन्दकुन्द · सम्पादक एवं हिन्दी अनुवाद: डॉ. देवेन्द्रकुमार शास्त्री
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स्वामी कार्तिकेयानुप्रेक्षा

धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 394–403 — दसों धर्मों का क्रमिक निरूपण।

साभार: स्वामी कार्तिकेय · भाषा टीका: पं. जयचन्दजी छाबड़ा
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पद्मनन्दि पंचविंशतिका

धर्मोपदेशामृत, श्लोक 82–106 — दशलक्षण धर्म का विस्तृत विवेचन।

साभार: आचार्य पद्मनन्दि · टीका: पं. गजाधरलाल न्यायतीर्थ
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रत्नकरण्ड श्रावकाचार — पं. सदासुखदासजी की टीका

टीका में ‘धर्म के दश लक्षण’ — उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक विस्तृत विवेचन।

साभार: आचार्य समन्तभद्र · टीका: पं. सदासुखदासजी कासलीवाल
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सर्वार्थसिद्धि

तत्त्वार्थसूत्र 9.6 की प्रमुख टीका — दसों धर्मों के शास्त्रीय लक्षण।

साभार: आचार्य पूज्यपाद · सम्पादन-अनुवाद: सिद्धान्ताचार्य पं. फूलचन्द्र शास्त्री
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श्री दशलक्षण धर्म (दशधर्म-दीपक)

जाप्य-मंत्र, दशधर्म स्तवन, दशलक्षण व्रत-कथा, भजन व व्रतोद्यापन सहित दशलक्षण धर्म की व्याख्या (दिगम्बर जैन पुस्तकालय, सूरत; 138 पृष्ठ, स्कैन)।

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मूलाचार (उत्तरार्ध)

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तत्त्वार्थ राजवार्तिक

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तत्त्वार्थ श्लोकवार्तिकालंकार — भाग 7

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तत्त्वार्थ वृत्ति

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चारित्रसार

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