दशलक्षण धर्म का मूल सूत्र — अध्याय 9, सूत्र 6।
धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 70–80 — दसों धर्म, एक-एक गाथा में।
धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 394–403 — दसों धर्मों का क्रमिक निरूपण।
धर्मोपदेशामृत, श्लोक 82–106 — दशलक्षण धर्म का विस्तृत विवेचन।
टीका में ‘धर्म के दश लक्षण’ — उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक विस्तृत विवेचन।
तत्त्वार्थसूत्र 9.6 की प्रमुख टीका — दसों धर्मों के शास्त्रीय लक्षण।
जाप्य-मंत्र, दशधर्म स्तवन, दशलक्षण व्रत-कथा, भजन व व्रतोद्यापन सहित दशलक्षण धर्म की व्याख्या (दिगम्बर जैन पुस्तकालय, सूरत; 138 पृष्ठ, स्कैन)।