‘कर्म विचारे कौन?’, ‘नेता कौन?’ और ‘भेदविज्ञान’ जैसे बाल-नाटकों का संग्रह — निमित्त-उपादान, छह द्रव्य व भेदज्ञान पर (68 पृष्ठ)।
‘अब नहीं माँगूँगी’, ‘अब नहीं फोड़ूँगा’ आदि देवदर्शन व अहिंसा के संस्कार सिखाने वाले बच्चों के लघु नाटकों का संग्रह।
स्कूल व पाठशाला के प्रसंगों द्वारा बच्चों में शाकाहार व जैन संस्कार जगाने वाला नाटक (पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर)।
दो बहनों के संवाद से श्रुत पंचमी, षट्खण्डागम व जिनवाणी-संरक्षण का महत्व समझाने वाली बच्चों की लघु नाटिका।
बालक पद्मनंदी के जन्म, ग्वाले कौण्डेश के प्रसंग और मुनिराज के उपदेश तक आचार्य कुंदकुंद के जीवन पर संवाद-नाटक।
चक्ररत्न व दिग्विजय से भरत-बाहुबली के मान-संघर्ष और बाहुबली के वैराग्य व केवलज्ञान तक की कथा पर मंच-निर्देश सहित नाटिका (13 पृष्ठ)।
सम्यग्दर्शन के उपगूहन अंग की कथा — सेठ जिनभक्त व सूर्य चोर — पर तीन दृश्यों का एकांकी, शिक्षा सहित (7 पृष्ठ)।
सेठजी और मुनीम के प्रसंग से नियम-पालन के फल को दिखाने वाला लघु हास्य-नाटक (4 पृष्ठ, हस्तलिखित स्कैन)।
कुलमद, जातिमद, बलमद आदि आठ मदों के व्यंग्यपूर्ण पात्रों के माध्यम से उत्तम मार्दव धर्म का मर्म समझाने वाली लघु नाटिका।
पाठशाला जाने से बच्चों को मिलने वाले संस्कारों पर गीत-संवाद शैली का लघु नुक्कड़ नाटक।
ब्राह्मी-सुन्दरी, सुलोचना, मैनासुन्दरी, चन्दनबाला, सीता आदि जैन सतियों पर लघु नाटिकाओं व संवादों का संग्रह, गायन व प्रश्नोत्तरी सहित (15 पृष्ठ, हस्तलिखित)।
राजगृह के जम्बूकुमार के वैराग्य, विवाह के अगले दिन दीक्षा और केवलज्ञान की कथा पर संचालन-सहित पाठशाला-नाटक (45 पृष्ठ, हस्तलिखित स्कैन)।
सौधर्म इन्द्र व शची इन्द्राणी के प्रश्नोत्तर द्वारा दशलक्षण धर्म, सम्यग्दर्शन व रत्नत्रय का स्वरूप समझाने वाला दो भागों का संवाद-नाटक (हस्तलिखित स्क्रिप्ट, 5 पृष्ठ)।
जुलूस व कार्यक्रमों के लिए ‘त्रिशला नंदन वीर की — जय बोलो महावीर की’ जैसे जैन धार्मिक नारों का एक पृष्ठ।
जैन विषयों पर त्रि-आयामी मॉडल बनाकर वीडियो में समझाने की प्रतियोगिता की नियमावली व विषय-सूची (9 पृष्ठ)।